क्रिसमस का शैतान

    जैसे ही दिसम्बर का महीना आता है सभी क्रिसमस की तैयारियों मे जुट जाते हैं। क्रिसमस को लेकर बच्चे से लेकर बूढे तक सभी बहुत उत्साह मे रहते हैं। ख़ासकर बच्चे तो दिन दिनभर बस सांता क्लाॅज के ही मीठे सपनों मे खोए रहते है। अपनी प्यारी नींद मे वो बस उससे मिलने वाले उपहारों की ही सोच रहे होते है, उसी समय एक डरावना पुतला चुपके से आकर उन्हें उठा ले जाता है। सड़कों पर बच्चे भाग रहे होते है और वो राक्षस उनका पीछा कर रहा होता है। अंततः वो सबसे शैतान बच्चे को पकड़ लेता है और लोग तालियां बजाने लगते है।

    जी हाँ, जर्मनी और ऑस्ट्रिया जैसे बहुत सारे देशों मे क्रिसमस के दो हफ्ते पहले एक अनोखा त्योहार मनाया जाता है, जिसे क्रैंप्सनाइट या क्रैंप्सनाच कहते हैं। सांता क्लाज की तरह क्रैंप्स भी एक काल्पनिक चरित्र है। बदमाशी करने वाले बच्चों को यह कह कर डराया जाता है कि वह आकर उन्हें उठा ले जाएगा। पश्चिमी देशों मे य़ह पारम्परिक क्रिसमस का हिस्सा है।

    ऑस्ट्रिया मे प्रचलित एक लोककथा के अनुसार सांता क्लाज अच्छे बच्चों को उपहार देते है लेकिन शरारती बच्चों को को सज़ा देने के लिए उन्हें क्रैंप्स को दे देते है। क्रैंप्स का रूप बेहद ही डरावना होता है। इसका सिर बकरे की आकृति वाले एक दैत्य की तरह बनाया जाता है जिसके लंबे लंबे सींग होते हैं। खून पीने वाले नुकीले दांत और लंबी जीभ होती है। इसके कमर मे भेड़, गाय, बकरी, भैंस आदि की शक्ल रूपी डरावने मास्क लगे रहते हैं। इनमे से कुछ पुतलों के आँखों से आग भी निकलती रहती है।

    क्रैंप्स अल्पाइन देशों की लोककथाओं का हिस्सा है। 17वीं सदी से इस फेस्टिवल को मनाए जाने की शुरूवात हुई जो आज भी जारी है। 5 दिसम्बर की शाम संत निकोलस की परेड के साथ क्रैंप्स घर घर जाता है। वैसे तो यह उत्सव दिसम्बर के पहले हफ्ते मे मनाने का चलन है।लेकिन कई देशों मे यह दिसम्बर के मध्य मे भी मनाया जाता है। अपने वैभव, ताम-झाम के साथ ये दानव अब स्विट्जरलैंड, चेक गणराज्य, हंगरी, और इटली के भी बहुत सारे शहरों तक पहुंच चुका है। समय और स्थान के साथ इसका नाम बदल जाता है।

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